क्या कालाढूंगी में युवा चेहरे पर दांव खेलेगी कांग्रेस? चर्चा में विशाल भोजक

Kalka Dhoongi | Congress | Vishal Singh Bhojak : उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। कालाढूंगी सीट पर कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इसी बीच उत्तराखंड युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष विशाल सिंह भोजक का नाम दावेदार के तौर पर सामने आने से सियासी हलचल बढ़ गई है।

कालाढूंगी विधानसभा सीट पर कांग्रेस के सामने इस बार मजबूत प्रत्याशी चुनने की चुनौती है। पार्टी ऐसे चेहरे की तलाश में हो सकती है…जो संगठन को मजबूती देने के साथ ही क्षेत्र के मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ बना सके। ऐसे में युवा नेता विशाल सिंह भोजक की दावेदारी को लेकर चर्चाएं तेज हो रही हैं।

विशाल सिंह भोजक युवा कांग्रेस में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। युवाओं से जुड़े सवालों, रोजगार, भर्ती परीक्षाओं और शिक्षा जैसे विषयों पर उनकी सक्रियता देखने को मिली है। युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी भागीदारी भी उनकी राजनीतिक पहचान का हिस्सा रही है।

उनकी दावेदारी की चर्चा के बीच यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या कांग्रेस इस बार कालाढूंगी में किसी युवा चेहरे को मौका दे सकती है। पार्टी के लिए युवाओं के बीच मजबूत संपर्क रखने वाला उम्मीदवार चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभा सकता है।

कालाढूंगी में कांग्रेस के लिए प्रत्याशी का चयन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी को ऐसे उम्मीदवार की जरूरत होगी, जो स्थानीय समस्याओं को प्रमुखता से उठाने के साथ कार्यकर्ताओं को एकजुट कर सके। विशाल भोजक के नाम की चर्चा को इसी राजनीतिक समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है।

अगर कांग्रेस नेतृत्व युवा चेहरे पर दांव लगाने का फैसला करता है…तो विशाल सिंह भोजक संभावित विकल्पों में शामिल हो सकते हैं। हालांकि उनकी दावेदारी कितनी मजबूत होगी यह पार्टी के आंतरिक समीकरणों और नेतृत्व के फैसले पर निर्भर करेगा।

फिलहाल कालाढूंगी विधानसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। विशाल सिंह भोजक के नाम पर हो रही चर्चा के बीच पार्टी के अगले कदम पर नजर रहेगी। अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान को ही लेना है।

ऐसे में आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस कालाढूंगी में अपने पुराने राजनीतिक समीकरणों पर भरोसा करती है या चुनावी मैदान में किसी नए और युवा चेहरे को उतारने का फैसला लेती है।

उत्तराखंड में करवा चौथ पर महिला कर्मचारियों को छुट्टी, CM धामी ने जारी कराया आदेश

Uttarakhand | CM Dhami | Karwa Chauth Holiday : उत्तराखंड की महिला कर्मचारियों के लिए करवा चौथ के अवसर पर राहत भरी खबर है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर राज्य सरकार ने 29 अक्टूबर 2026 गुरुवार को महिला कार्मिकों के लिए सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। इस संबंध में शासन की ओर से आदेश जारी कर दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि करवा चौथ महिलाओं की आस्था, प्रेम और पारिवारिक विश्वास से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। राज्य सरकार महिलाओं की भावनाओं, धार्मिक आस्था और परंपराओं का सम्मान करती है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

सीएम धामी ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश में विकास कार्यों के साथ-साथ समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक त्योहारों से जुड़ी भावनाओं को भी मजबूती मिले। करवा चौथ जैसे पर्व परिवारों में प्रेम, विश्वास और आपसी समर्पण की भावना को मजबूत करते हैं।

उत्तराखंड विधानसभा के आखिरी दिन उमेश कुमार का इस्तीफा, हंगामे के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुआ सदन

Uttarakhand Politics | Umesh Kumar Resignation | Assembly Session : उत्तराखंड विधानसभा के मौजूदा सरकार के अंतिम सत्र के आखिरी दिन सियासी हलचल तेज हो गई। खानपुर के निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी को सौंपा। स्पीकर ने इस्तीफा मिलने की पुष्टि करते हुए इसे नियमानुसार आगे की कार्रवाई के लिए प्रभारी सचिव के पास भेज दिया।

इस्तीफे से पहले उमेश कुमार ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की। उन्होंने कहा कि वह दुखी और व्यथित हैं। उनके मुताबिक जिस जिले से वह आते हैं वहां के मुद्दों को भी सदन में मजबूती से नहीं उठा पा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दूसरे विधायक उनके साथ खड़े होकर इन मुद्दों पर आवाज नहीं उठा रहे हैं।

विधायक उमेश कुमार ने विपक्ष से भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े चार साल से उन्हें उम्मीद थी कि विपक्ष भ्रष्टाचार के मामलों, जनता की समस्याओं और किसानों से जुड़े मुद्दों पर उनका साथ देगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

उमेश कुमार ने कहा कि अब हालात ऐसे हो गए हैं कि उन्हें अकेले ही लड़ाई लड़नी पड़ रही है। उनके इस बयान और इस्तीफे ने विधानसभा सत्र के अंतिम दिन राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया।

अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुआ सत्र

27 और 28 अक्टूबर को आयोजित उत्तराखंड विधानसभा का सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। यह मौजूदा सरकार का अंतिम विधानसभा सत्र था। अब अगले विधानसभा चुनाव के बाद सदन की तस्वीर बदल सकती है और कई नए चेहरे नजर आ सकते हैं।

इस बार सत्र की अवधि भी काफी कम रही। करीब डेढ़ दिन में सदन की कार्यवाही समेट दी गई और कुल मिलाकर लगभग आठ घंटे ही कामकाज हुआ।

विधानसभा सत्र के अंतिम दिन सदन में जमकर हंगामा हुआ। विरोध प्रदर्शन के दौरान काले झंडे दिखाए गए और प्रश्नावली फाड़े जाने की घटना भी सामने आई। हंगामे के चलते प्रश्नकाल भी नहीं चल पाया।

चुनाव से पहले होने वाले संयुक्त फोटो सेशन में विपक्ष की गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय रही। इस तरह मौजूदा सरकार का अंतिम सत्र कम अवधि, हंगामे और विधायक उमेश कुमार के इस्तीफे के कारण सुर्खियों में रहा।

अब विधानसभा की अगली बैठक नई सरकार के गठन के बाद होगी। उससे पहले सभी राजनीतिक दलों के सामने चुनावी मैदान में उतरने और जनता के बीच अपने कामकाज का हिसाब रखने की चुनौती होगी।

अल्मोडा निवासी IPS तृप्ति भट्ट को मिली CBI में पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी

Tripti Bhatt | CBI Appointment | Uttarakhand News : उत्तराखंड की आईपीएस अधिकारी तृप्ति भट्ट को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) में अहम जिम्मेदारी मिली है। उत्तराखंड कैडर की 2013 बैच की अधिकारी तृप्ति भट्ट को सीबीआई में पुलिस अधीक्षक (SP) के पद पर नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति प्रतिनियुक्ति के आधार पर पांच साल के लिए की गई है। उनकी नियुक्ति से जुड़ी जानकारी आधिकारिक आईपीएस वेबसाइट पर भी दर्ज है।

तृप्ति भट्ट मूल रूप से अल्मोड़ा की रहने वाली हैं। पुलिस और प्रशासनिक सेवा में काम करने का अनुभव रखने वाली तृप्ति अब केंद्रीय जांच एजेंसी में अपनी सेवाएं देंगी। सीबीआई में नई जिम्मेदारी मिलने से उनके करियर में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है।

तृप्ति भट्ट की नियुक्ति पदभार ग्रहण करने की तारीख से पांच साल या केंद्र सरकार के अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी। दोनों में से जो भी पहले लागू होगा….उसी के आधार पर प्रतिनियुक्ति की अवधि तय होगी।

नियुक्ति से जुड़े आदेश के बाद उत्तराखंड सरकार को उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्यमुक्त करना है….ताकि वह सीबीआई में नई जिम्मेदारी संभाल सकें। सीबीआई देश की प्रमुख जांच एजेंसियों में शामिल है। यहां एसपी के पद पर अधिकारी को जांच और उससे जुड़े कामकाज की निगरानी जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभानी होती हैं।

तृप्ति भट्ट का जन्म 6 दिसंबर 1989 को हुआ था। उनकी शुरुआती पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय से हुई। बचपन में ही उन्हें पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से मिलने का अवसर मिला था। मीडिया रिपोर्टों में इस मुलाकात को उनके जीवन का महत्वपूर्ण अनुभव बताया गया है।

तृप्ति ने गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य तय किया और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।

वर्ष 2012 की सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 165 हासिल की। इसके बाद उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए हुआ और उन्हें उत्तराखंड कैडर मिला।

तृप्ति भट्ट की चर्चा उनकी पढ़ाई और पुलिस सेवा के साथ-साथ उनके करियर से जुड़े फैसलों के लिए भी होती है। मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि उन्होंने आईपीएस अधिकारी बनने के लक्ष्य के लिए 16 नौकरी के अवसर स्वीकार नहीं किए।

इन अवसरों में सरकारी संस्थानों और निजी कंपनियों से जुड़े पद शामिल बताए जाते हैं। रिपोर्टों में एनटीपीसी, इसरो, मारुति सुजुकी और टाटा मोटर्स का भी उल्लेख किया गया है। उन्होंने इन विकल्पों के बजाय सिविल सेवा की तैयारी जारी रखी और अंततः यूपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल की।

यह प्रसंग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच अक्सर चर्चा में रहता है। हालांकि 16 अवसरों और संबंधित संस्थानों की पूरी सूची की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

सीबीआई में नियुक्ति से पहले तृप्ति भट्ट उत्तराखंड में गृह एवं कारागार विभाग में अपर सचिव की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। उनके पास पुलिस अधीक्षक, फायर सर्विस का अतिरिक्त प्रभार भी था। इससे पहले वह राज्य पुलिस में विभिन्न पदों पर सेवाएं दे चुकी हैं।

राज्य में प्रशासनिक और पुलिस सेवा का अनुभव हासिल करने के बाद अब उन्हें केंद्रीय जांच एजेंसी में काम करने का अवसर मिला है। उनकी नई जिम्मेदारी के तहत वह सीबीआई में पुलिस अधीक्षक के रूप में सेवाएं देंगी।

अल्मोड़ा से निकलकर आईपीएस अधिकारी बनने और अब सीबीआई में जिम्मेदारी मिलने तक तृप्ति भट्ट का सफर उनके करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद सिविल सेवा को लक्ष्य बनाना और यूपीएससी में सफलता हासिल करना उनकी यात्रा के प्रमुख हिस्से हैं।

सीबीआई में एसपी के पद पर पांच साल की प्रतिनियुक्ति मिलने के बाद तृप्ति भट्ट अब केंद्रीय स्तर पर अपनी सेवाएं देंगी। अल्मोड़ा से ताल्लुक रखने वाली तृप्ति की इस नियुक्ति से उत्तराखंड की पुलिस सेवा से जुड़ी एक अधिकारी को देश की प्रमुख जांच एजेंसी में काम करने का अवसर मिला है।

दिल्ली से हरिद्वार जाना होगा आसान, अगले महीने खुलेगा नया एक्सप्रेसवे; सफर में लगेगा सिर्फ 90 मिनट

Delhi-Haridwar Expressway | Nitin Gadkari |Uttarakhand News : दिल्ली से हरिद्वार जाने वाले लोगों के लिए अच्छी खबर है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि अगले महीने दिल्ली से हरिद्वार के लिए नया मार्ग खोला जाएगा। इससे दिल्ली से हरिद्वार का सफर करीब डेढ़ घंटे में पूरा हो सकेगा। इस मार्ग के शुरू होने से उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचना पहले के मुकाबले आसान होने की उम्मीद है।

नितिन गडकरी ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के राष्ट्रीय सम्मेलन में सड़क परियोजनाओं और देश में बेहतर कनेक्टिविटी के महत्व पर बात करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नई सड़क परियोजनाओं से यात्रा का समय घटाने और पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

गडकरी ने दिल्ली-मेरठ मार्ग का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले दिल्ली से मेरठ पहुंचने में करीब साढ़े तीन घंटे लगते थे, जबकि अब यह सफर लगभग 40 से 50 मिनट में पूरा हो जाता है।

उन्होंने दिल्ली से देहरादून के लिए बने नए मार्ग का भी जिक्र किया। गडकरी के मुताबिक पहले दिल्ली से देहरादून पहुंचने में करीब सात घंटे लगते थे…लेकिन अब यह दूरी लगभग दो घंटे में तय की जा सकती है।

उन्होंने बताया कि अगले महीने दिल्ली से हरिद्वार के लिए नया मार्ग खोलने की योजना है। उनके दावे के मुताबिक इससे दिल्ली से हरिद्वार पहुंचने में करीब 90 मिनट लगेंगे। हालांकि, वास्तविक यात्रा समय शुरुआती स्थान, यातायात और मार्ग की स्थिति पर भी निर्भर करेगा।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चारधाम सड़क परियोजना का करीब 80 से 85 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि सड़क संपर्क बेहतर होने से उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों तक पहुंचने वाले यात्रियों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है।

बेहतर सड़कें धार्मिक पर्यटन के साथ स्थानीय कारोबार और रोजगार को भी बढ़ावा दे सकती हैं। इससे होटल, परिवहन, दुकानदारों और पर्यटन से जुड़े अन्य कारोबारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

गडकरी ने कहा कि सरकार देशभर में एक्सप्रेसवे और ग्रीन एक्सप्रेसवे बनाने पर जोर दे रही है। बेहतर सड़क नेटवर्क से शहरों और पर्यटन स्थलों के बीच यात्रा आसान होती है। सड़क निर्माण के दौरान रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और सीमेंट, स्टील जैसी निर्माण सामग्री की मांग भी बढ़ती है।

उन्होंने अयोध्या और महाराष्ट्र में चल रही सड़क परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। इनमें पंढरपुर पालखी मार्ग जैसी परियोजनाएं शामिल हैं…जिनका उद्देश्य श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुविधाजनक बनाना है।

केंद्रीय मंत्री ने दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का उदाहरण देते हुए कहा कि नए सड़क मार्ग दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों को आर्थिक केंद्रों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उनके मुताबिक बेहतर बुनियादी ढांचा देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ पर्यटन की संभावनाओं को भी बढ़ाता है।

अवैध प्लॉटिंग पर एमडीडीए की बड़ी कार्रवाई, तीन जगह बुलडोजर चलाया, दो निर्माण सील

MDDA | IllegalPlotting |DehradunNews : मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण ने अवैध प्लॉटिंग और बिना स्वीकृत नक्शे के किए जा रहे निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की है। विकासनगर क्षेत्र में तीन जगह अवैध प्लॉटिंग को ध्वस्त किया गया…जबकि ऋषिकेश क्षेत्र में दो अवैध निर्माण सील किए गए। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि नियमों के विरुद्ध जमीन पर प्लॉट काटने और बिना अनुमति निर्माण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।

27 अक्टूबर को हुई इस कार्रवाई के दौरान एमडीडीए की टीम ने अलग-अलग स्थानों पर पहुंचकर अवैध प्लॉटिंग और निर्माणों की जांच की। इसके बाद संबंधित स्थलों पर नियमानुसार ध्वस्तीकरण और सीलिंग की कार्रवाई की गई।

विकासनगर के भीमावाला क्षेत्र में छोटी कैनाल रोड स्थित नायरा पेट्रोल पंप के पीछे करीब चार से पांच बीघा जमीन पर अवैध प्लॉटिंग की जा रही थी। प्राधिकरण की जानकारी के मुताबिक संजय चौहान और अन्य लोगों की ओर से विकसित की जा रही इस प्लॉटिंग के लिए आवश्यक स्वीकृति नहीं ली गई थी। एमडीडीए ने यहां कार्रवाई करते हुए अवैध प्लॉटिंग को ध्वस्त कर दिया।

विकासनगर में डॉक्टरगंज के पुल संख्या एक और दो के बीच शक्ति कैनाल के पास भी प्राधिकरण ने कार्रवाई की। यहां आशु उनियाल, हर्ष रावत और अन्य लोगों की ओर से करीब पांच बीघा भूमि पर प्लॉटिंग की जा रही थी। प्राधिकरण ने इसे ध्वस्त कर दिया।

ऋषिकेश क्षेत्र के रायवाला में प्रेम दत्त जोशी की ओर से करीब पांच बीघा जमीन पर बिना तलपट मानचित्र की स्वीकृति के प्लॉटिंग की जा रही थी। एमडीडीए की टीम ने मौके पर पहुंचकर इस प्लॉटिंग को भी ध्वस्त कर दिया।

अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एमडीडीए ने ऋषिकेश क्षेत्र में दो स्थानों पर सीलिंग की। हरिपुर कला की गली नंबर पांच में कपिल मदान की ओर से किए जा रहे निर्माण को सील किया गया। इसके अलावा हरिद्वार रोड पर रायवाला में पंजाब नेशनल बैंक के पास तुषार नरूला के निर्माण पर भी सीलिंग की कार्रवाई की गई।

एमडीडीए की कार्रवाई के बीच जमीन खरीदने वालों के लिए भी जरूरी है कि वे भूखंड खरीदने से पहले उसकी वैधता की जांच कर लें। जमीन का स्वीकृत लेआउट, जरूरी मानचित्र और प्राधिकरण की अनुमति की पुष्टि करना महत्वपूर्ण है। बिना स्वीकृति विकसित की गई कॉलोनियों में सड़क, जल निकासी और अन्य बुनियादी सुविधाओं की समस्या हो सकती है। ऐसे भूखंड खरीदने पर कानूनी और आर्थिक परेशानी भी झेलनी पड़ सकती है।

हल्द्वानी में शिफ्ट नहीं होगा नैनीताल हाईकोर्ट ! शिफ्टिंग का प्रस्ताव फिर खारिज

Nainital: High Court: Belbaba: उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी के बेलबाबा क्षेत्र में शिफ्ट करने की योजना को बड़ा झटका लगा है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की क्षेत्रीय अधिकार प्राप्त समिति ने तराई केंद्रीय वन प्रभाग की 30 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि पर हाईकोर्ट परिसर बनाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

दरअसल, हाईकोर्ट को हल्द्वानी स्थानांतरित करने के लिए बेलबाबा क्षेत्र में 30 हेक्टेयर वन भूमि की मांग की गई थी। प्रस्तावित निर्माण के लिए 123 पेड़ों के कटान की योजना थी। लेकिन समिति ने पाया कि प्रस्ताव तैयार करते समय वन संरक्षण अधिनियम और संबंधित नियमों के तहत गैर-वन भूमि के विकल्पों का पर्याप्त परीक्षण नहीं किया गया।

इस मामले में नैनीताल के तत्कालीन जिलाधिकारी की ओर से बेलबाबा में हाईकोर्ट शिफ्ट करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। इसके खिलाफ अधिवक्ता कौशल साह जगाती ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने इस संबंध में हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था। अब समिति की रिपोर्ट अधिवक्ता कौशल साह जगाती और कार्तिकेय हरि गुप्ता को प्राप्त हुई है। हालांकि, रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

समिति की बैठक में हाईकोर्ट की ओर से दलील दी गई थी कि नैनीताल स्थित मौजूदा परिसर में मुकदमों और कर्मचारियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी के चलते जगह की कमी हो रही है। वर्ष 2010 में जहां मुकदमों की संख्या करीब 4,000 थी, वहीं अब यह बढ़कर 64,000 से अधिक हो चुकी है। इसके अलावा नैनीताल में पर्यटन सीजन के दौरान यातायात का दबाव, जाम और वादकारियों को महंगे होटलों में ठहरने जैसी समस्याओं का भी हवाला दिया गया।

हालांकि, मंत्रालय की क्षेत्रीय अधिकार प्राप्त समिति ने जिला प्रशासन की ओर से गैर-वन भूमि उपलब्ध नहीं होने का प्रमाण पत्र दिए जाने पर गंभीर आपत्ति जताई। गौरतलब है कि इससे पहले गौलापार में करीब 4,238 पेड़ों के कटान और आवासीय भवन निर्माण से जुड़े प्रस्ताव को भी समिति ने 24 जनवरी 2024 को खारिज कर दिया था।

इस बार भी वन संरक्षण एवं संवर्द्धन नियम, 2023 के प्रावधानों के तहत बेलबाबा में हाईकोर्ट निर्माण के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल सकी है। ऐसे में नैनीताल से हल्द्वानी हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की योजना फिलहाल मुश्किलों में घिरती नजर आ रही है।

बिना पंजीकरण कुत्ता पलना पड़ सकता है महंगा, नगर निगम ने दे दी है डेडलाइन

Mussoorie News | Pet Dog Registration | Municipal Council : उत्तराखंड के मसूरी में पालतू कुत्ता रखने वालों को अब उसका पंजीकरण कराना होगा। नगर पालिका परिषद ने शहर के सभी डॉग ओनर्स से 30 नवंबर तक रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी करने को कहा है। इसके लिए महज 10 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। खास बात यह है कि पंजीकरण के लिए लोगों को नगर पालिका कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। आवेदन की सुविधा ऑनलाइन उपलब्ध कराई गई है।

नगर पालिका इस व्यवस्था के जरिए शहर में पालतू कुत्तों और उनके मालिकों का रिकॉर्ड तैयार करना चाहती है। इससे कुत्तों से जुड़ी शिकायत मिलने या किसी के काटने की घटना होने पर संबंधित मालिक की पहचान करने में मदद मिल सकती है।

नगर पालिका परिषद ने पालतू कुत्ते रखने वाले लोगों से निर्धारित समय सीमा के भीतर रजिस्ट्रेशन कराने की अपील की है। नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने बताया कि शहर में कुत्तों के काटने की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।

पंजीकरण होने से नगर पालिका के पास पालतू कुत्तों और उनके मालिकों से जुड़ी जानकारी उपलब्ध रहेगी। इससे शिकायतों पर कार्रवाई करने और संबंधित मालिक तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।

पालतू कुत्तों का पंजीकरण कराने के लिए नगर पालिका की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। इसके लिए 10 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।

कुत्ता पालने वाले लोगों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना समय रहते पंजीकरण करा लें। हालांकि, रजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी दस्तावेजों और आवेदन की पूरी प्रक्रिया की जानकारी नगर पालिका की आधिकारिक वेबसाइट से प्राप्त करना उचित होगा।

शहर में पालतू कुत्तों से जुड़ी शिकायतों और काटने की घटनाओं को देखते हुए उनकी पहचान का रिकॉर्ड तैयार करना जरूरी माना जा रहा है। पंजीकरण से नगर पालिका को यह जानकारी जुटाने में मदद मिलेगी कि किस व्यक्ति के पास पालतू कुत्ता है।

हालांकि केवल पंजीकरण कराने से कुत्तों के काटने की घटनाओं पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकती। इसके लिए पालतू जानवरों की उचित देखभाल, सार्वजनिक स्थानों पर निगरानी और मालिकों की जिम्मेदारी भी जरूरी है।

नगर पालिका ने सभी पालतू कुत्ता पालकों से 30 नवंबर तक पंजीकरण कराने की अपील की है। निर्धारित समय सीमा के बाद रजिस्ट्रेशन नहीं कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है। हालांकि उपलब्ध जानकारी में जुर्माने की राशि या कार्रवाई के विस्तृत नियम स्पष्ट नहीं किए गए हैं।

ऐसे में मसूरी में कुत्ता पालने वाले लोगों के लिए जरूरी है कि वे नगर पालिका की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध निर्देशों की जानकारी लेकर समय पर पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करें।

उत्तराखंड में 2027 चुनाव से पहले कांग्रेस की बढ़ी टेंशन, टिकट के लिए कई दावेदार!

Uttarakhand Elections 2027 | Congress Politics | Ticket Distribution : उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। चुनाव में भाजपा को चुनौती देने की तैयारी कर रही कांग्रेस के सामने अपनी ही पार्टी के भीतर टिकट वितरण को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है। पार्टी में इस बार विधानसभा सीटों पर दावेदारी करने वाले नेताओं की संख्या बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है। ऐसे में सही प्रत्याशी का चयन करना और टिकट नहीं मिलने वाले नेताओं को साथ बनाए रखना कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा।

प्रदेश में कांग्रेस पिछले दस साल से सत्ता से बाहर है। इस दौरान पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता चुनाव में बेहतर प्रदर्शन और सत्ता में वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं। अब 2027 के चुनाव को लेकर पार्टी के भीतर सक्रियता बढ़ रही है। कई नेताओं को लगता है कि सरकार के खिलाफ नाराजगी और स्थानीय स्तर पर भाजपा विधायकों की चुनौतियां कांग्रेस के लिए चुनावी अवसर बन सकती हैं।

हालांकि, चुनाव में जीत की संभावनाओं को लेकर नेताओं के अपने-अपने आकलन हैं। टिकट के लिए बढ़ती दावेदारी पार्टी के लिए कितनी चुनौती बनेगी….यह आने वाले समय में साफ होगा।

कांग्रेस के सामने इस बार चुनौती केवल कुछ चुनिंदा सीटों तक सीमित नहीं रह सकती। पार्टी के भीतर ऐसा आकलन है कि 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों की तुलना में 2027 में अधिक सीटों पर कई-कई नेता टिकट मांग सकते हैं।

लंबे समय से संगठन में काम कर रहे नेताओं के साथ क्षेत्रीय स्तर पर सक्रिय नए चेहरे भी चुनाव लड़ने की तैयारी में जुट सकते हैं। ऐसे में एक ही सीट पर कई मजबूत दावेदार सामने आने की संभावना है।

पार्टी को प्रत्याशी चुनते समय केवल राजनीतिक अनुभव ही नहीं, बल्कि संगठन में सक्रियता, क्षेत्र में जनाधार, पिछले चुनावों के प्रदर्शन और जीतने की संभावनाओं पर भी ध्यान देना होगा।

2027 के चुनाव में कांग्रेस के सामने एक और चुनौती पुराने नेताओं और नई पीढ़ी के बीच संतुलन बनाने की होगी। लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे नेता टिकट पर अपना दावा पेश कर सकते हैं। वहीं युवा और नए चेहरे भी चुनाव लड़ने का मौका चाहते हैं।

ऐसे में पार्टी नेतृत्व के लिए यह तय करना अहम होगा कि किस सीट पर अनुभवी नेता को मौका दिया जाए…और कहां नए चेहरे पर दांव लगाया जाए। किसी एक नाम को टिकट मिलने पर बाकी दावेदारों की नाराजगी भी सामने आ सकती है।

कांग्रेस को क्षेत्रीय समीकरणों और संगठन की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फैसला लेना होगा…ताकि प्रत्याशी घोषित होने के बाद चुनावी तैयारी प्रभावित न हो।

कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता शीशपाल बिष्ट का कहना है कि पिछले दो विधानसभा चुनावों की तुलना में इस बार टिकट के दावेदारों की संख्या ज्यादा दिखाई दे रही है। उनके मुताबिक स्क्रीनिंग कमेटी की घोषणा के बाद पार्टी को प्रत्याशियों के चयन के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है।

उन्होंने कहा कि कई मजबूत दावेदारों के बीच किसी एक नाम पर सहमति बनाना प्रदेश नेतृत्व और पार्टी हाईकमान के लिए चुनौतीपूर्ण होगा।

टिकट चयन की प्रक्रिया के दौरान पार्टी को अलग-अलग सीटों पर दावेदारी करने वाले नेताओं की राजनीतिक स्थिति और चुनाव जीतने की संभावनाओं का आकलन करना पड़ेगा।

कांग्रेस के लिए मुश्किल केवल प्रत्याशियों के नाम तय करने तक सीमित नहीं रहेगी। टिकट घोषित होने के बाद नाराज नेताओं को मनाना भी पार्टी के चुनावी प्रबंधन का अहम हिस्सा होगा।

टिकट नहीं मिलने पर कुछ दावेदार निर्दलीय चुनाव लड़ने का विकल्प चुन सकते हैं….जबकि कुछ दूसरे राजनीतिक रास्ते तलाश सकते हैं। ऐसी स्थिति में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी को नुकसान पहुंचने की आशंका रहेगी।

इसलिए कांग्रेस नेतृत्व के सामने टिकट वितरण से पहले ही दावेदारों के बीच संवाद और सहमति बनाने की जरूरत होगी। जिन नेताओं को टिकट नहीं मिलता….उन्हें संगठन में जिम्मेदारी देकर साथ बनाए रखना भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

उत्तराखंड में 2027 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए सत्ता में वापसी का मौका होगा। लेकिन चुनावी मैदान में उतरने से पहले पार्टी को टिकट के दावेदारों के बीच तालमेल बनाना होगा।

अगर कांग्रेस समय रहते मजबूत प्रत्याशियों का चयन कर पाती है और टिकट नहीं मिलने वाले नेताओं को साथ रखने में सफल रहती है…तो इससे उसकी चुनावी तैयारियों को मजबूती मिल सकती है। वहीं टिकट वितरण के दौरान असंतोष बढ़ने पर पार्टी को अपने ही नेताओं की नाराजगी से जूझना पड़ सकता है।

ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की रणनीति केवल भाजपा के मुकाबले तक सीमित नहीं रहेगी। प्रत्याशियों का चयन, संगठन में एकजुटता और बगावत को रोकना भी पार्टी के लिए अहम परीक्षा साबित हो सकता है।

उत्तराखंड में 1 नवंबर तक कैसा रहेगा मौसम? बारिश और बर्फबारी पर आया अपडेट

Weather Update | Uttarakhand Weather | Rain Alert : उत्तराखंड में मौसम एक बार फिर करवट ले सकता है। प्रदेश में 28 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच कई जगह हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। वहीं, शुक्रवार को कुछ स्थानों पर भारी वर्षा भी हो सकती है। मौसम में इस बदलाव के पीछे बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ और उत्तर-पश्चिम भारत की ओर बढ़ रहे पश्चिमी विक्षोभ की भूमिका हो सकती है।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, चक्रवात ‘अर्नब’ के बुधवार सुबह आंध्र प्रदेश के तट तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। इसी दौरान उत्तर-पश्चिम भारत में पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव भी देखने को मिल सकता है। इन मौसमी परिस्थितियों के चलते उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना बन रही है।

हालांकि प्रदेश में संभावित बारिश को केवल चक्रवात का सीधा असर नहीं माना जा सकता। पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय मौसम परिस्थितियां भी इसमें भूमिका निभा सकती हैं।

मौसम विभाग ने बुधवार को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं बहुत हल्की से हल्की बारिश होने की संभावना जताई है। इन जिलों में 3,500 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी भी हो सकती है।

प्रदेश के अन्य जिलों में बुधवार को मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। हालांकि आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति में बदलाव देखने को मिल सकता है।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 29 और 30 अक्टूबर को प्रदेश के कुछ हिस्सों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। हवा के झोंकों की गति 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है।

ऐसे में लोगों को मौसम के ताजा अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी जाती है। पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए।

फिलहाल उत्तराखंड के ज्यादातर हिस्सों में मौसम शुष्क बना हुआ है। तापमान भी सामान्य के आसपास दर्ज किया जा रहा है…जबकि कुछ पर्वतीय इलाकों में आंशिक बादल छाए हुए हैं।

मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार को प्रदेश के सभी जिलों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। इसके बाद बुधवार से पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम में बदलाव दिखाई दे सकता है।

आने वाले दिनों में बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी से ठंड बढ़ने की संभावना है। हालांकि बारिश की तीव्रता और उसका असर अलग-अलग जिलों में मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।